अपनी धरोहर न्यास द्वारा हल्द्वानी में धरोहर संवाद–ढोल-दमाऊ कार्यशाला का 20 सितंबर को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में होगा भव्य आयोजन।

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हल्द्वानी। अपनी धरोहर न्यास द्वारा उत्तराखंड की लोक-सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और लोककलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित किए जा रहे ‘धरोहर संवाद–ढोल-दमाऊ कार्यशाला’ की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम 20 सितंबर 2026 को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में आयोजित किया जाएगा। 

कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर अपनी धरोहर न्यास के अध्यक्ष श्री विजय भट्ट एवं महामंत्री श्री दिनेश बम ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में पत्रकार सम्मेलन कर कार्यक्रम की रूपरेखा एवं तैयारियों की जानकारी दी। इस दौरान श्री विजय भट्ट ने न्यास की स्थापना से लेकर अब तक किए गए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यों तथा आगामी धरोहर संवाद–ढोल-दमाऊ कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

अपनी धरोहर न्यास की स्थापना 16 जुलाई 2021 को हरेला पर्व के अवसर पर हुई थी। स्थापना के बाद से न्यास उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। न्यास का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों एवं सामाजिक समूहों को एक मंच पर लाकर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। 

इसी क्रम में न्यास द्वारा प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बैठकें, अधिवेशन, गोष्ठियां और संवाद आयोजित किए गए। श्री गोल्ज्यू संदेश यात्रा के माध्यम से भी प्रदेश के मैदानी, मध्य हिमालयी और उच्च हिमालयी क्षेत्रों को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का प्रयास किया गया। वर्ष 2022, 2024 और 2026 में आयोजित इन यात्राओं में लगभग 10,500 किलोमीटर की दूरी तय कर व्यापक जनसंवाद किया गया। 

न्यास के अनुसार, पूर्व में आयोजित ‘धरोहर संवाद’ कार्यक्रमों में उत्तराखंड की संस्कृति, लोकपरंपरा, प्रकृति और समाज से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इन संवादों के दौरान ढोल-दमाऊ को उत्तराखंड की लोक-सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसके संरक्षण और इससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता सामने आई। 

इसी उद्देश्य से ‘धरोहर संवाद–ढोल-दमाऊ कार्यशाला’ श्रृंखला शुरू की गई है। इसकी पहली कार्यशाला ऋषिकेश में आयोजित की गई थी और अब इसी क्रम में 20 सितंबर को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कला को व्यापक, सम्मानजनक एवं रोजगारोन्मुखी मंच उपलब्ध कराना है। 

लोक कलाकारों और पारंपरिक वाद्यों की होगी प्रस्तुति

कार्यशाला में कपकोट के साम गांव से मोहन दा, टिहरी के चंद्रबद्रनी क्षेत्र से डॉ. सोहन लाल जी तथा लमगड़ा, अल्मोड़ा निवासी श्री सुंदर दास जी द्वारा हुड़का सहित अन्य पारंपरिक लोकवाद्यों एवं लोककलाओं की प्रस्तुतियां दी जाएंगी। साथ ही राष्ट्रीय साहित्य अकादमी से सम्मानित प्रोफेसर दाताराम पुरोहित द्वारा ढोल-दमाऊ पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें इसकी परंपरा, सांस्कृतिक महत्व और पारंपरिक ज्ञान पर प्रकाश डाला जाएगा। 

कार्यक्रम में श्री चन्द्रशेखर जी, सह-प्रांत प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रोफेसर दुर्गेश पंत, महानिदेशक, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) तथा प्रोफेसर नवीन चन्द्र लोहनी, कुलपति, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्शन प्राप्त होगा। 

न्यास के पदाधिकारियों ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल ढोल-दमाऊ का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि ढोल-दमाऊ और ढोल सागर से जुड़े पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण, नई पीढ़ी तक हस्तांतरण, कारीगरों एवं कलाकारों को सम्मान और पहचान, तथा पारंपरिक कला को रोजगार से जोड़ने की संभावनाओं पर कार्य करना है। साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और मैदानी, मध्य हिमालयी तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों की सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। 

पत्रकार सम्मेलन के दौरान व्यवस्था प्रमुख श्री गोपाल सिंह पटवाल, महामंत्री श्री दिनेश बम, कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर राकेश चन्द्र रयाल और उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रोफेसर श्री डी एस फ़र्शवान ( कार्यक्रम संयोजक) सहित अपनी धरोहर न्यास के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। 


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